चिल्लाते हुए जब मैंने आसमान की तरफ देखा,
तो बिजली सी आवाज़ आई, क्यो? थक्क गया है क्या?
रोते हुए जब मैंने अपना सर ज़मीन पर रखा,
तो हवा सी आवाज़ आई , क्यो? टूट गया है क्या?
हाथ जोड़ कर जब आँखें नम्म की मैंने,
तो ख्याल सी आवाज़ आई , क्यो? हार गया है क्या?
खुद से भागते हुए जब गिर पड़ा मैं,
तो पत्थर सी आवाज़ आई , क्यो? डर गया है क्या?
हस्ते हुए जब अचानक रुक गया मैं,
तो दिल सी आवाज़ आई , क्यो? सेहम गया है क्या?
सांस लेते हुए जब घुट्ट सा गया मैं,
तो आवाज़ सी आवाज़ आई, क्यो? बिखर गया है क्या?
इन् आवाज़ों के बोझ से लड़ कर जब बाहर निकला मैं,
तो खुदा सी आवाज़ आई , क्यो? फिर तैयार है क्या?
तो बिजली सी आवाज़ आई, क्यो? थक्क गया है क्या?
रोते हुए जब मैंने अपना सर ज़मीन पर रखा,
तो हवा सी आवाज़ आई , क्यो? टूट गया है क्या?
हाथ जोड़ कर जब आँखें नम्म की मैंने,
तो ख्याल सी आवाज़ आई , क्यो? हार गया है क्या?
खुद से भागते हुए जब गिर पड़ा मैं,
तो पत्थर सी आवाज़ आई , क्यो? डर गया है क्या?
हस्ते हुए जब अचानक रुक गया मैं,
तो दिल सी आवाज़ आई , क्यो? सेहम गया है क्या?
सांस लेते हुए जब घुट्ट सा गया मैं,
तो आवाज़ सी आवाज़ आई, क्यो? बिखर गया है क्या?
इन् आवाज़ों के बोझ से लड़ कर जब बाहर निकला मैं,
तो खुदा सी आवाज़ आई , क्यो? फिर तैयार है क्या?
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